संघर्ष

सच हम नहीं सच तुम नहीं
सच है सतत संघर्ष ही ।

संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृन्त से झर कर कुसुम।

जो पंथ भूल रुका नहीं,
जो हार देखा झुका नहीं,

जिसने मरण को भी लिया हो जीत, है जीवन वही।

सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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